ईसाइयों के सबसे प्रमुख त्योहार क्रिसमस की पूर्व संध्या पर देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाई समुदाय के लोगों और उनके स्थलों को निशाना बनाने, उनके साथ ज़्यादतियाँ करने के विरोध में संविधान जागर समिति और बॉम्बे कैथलिक सभा ने शुक्रवार (26 दिसंबर) मुंबई के पश्चिमी उपनगर गोरेगांव में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में करीब सौ लोग शामिल हुए। प्रदर्शन एसवी रोड पर होटल रत्ना के बाहर हुआ जिसमें समुदाय के लोगों के अलावा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और सचेत नागरिकों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी सांप्रदायिक नफरत व हिंसा के खिलाफ लिखी तख्तियों के साथ खड़े थे।
आयोजकों ने कहा कि विरोध प्रदर्शन केवल कुछ घटनाओं को लेकर नहीं था बल्कि ईसाइयों के खिलाफ उनके महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार के समय शत्रुता के माहौल को लेकर था। ऐसे हमले कानून एवं व्यवस्था की मामूली समस्या नहीं हैं बल्कि संविधान पर हमला हैं और लोगों के बिना डर अपने धर्म का पालन करने, प्रार्थना करने के अधिकार पर हमला हैं।
प्रदर्शित तख्तियों, बैनरों पर संवैधानिक मूल्यों, धार्मिक आजादी और राज्य की जवाबदेही की जरूरत के बारे में नारे लिखे थे। मौजूद गणमान्य लोगों में प्रोफेसर अरविन्द निगले, श्रीधर शेलार और इकबाल शेख, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के पूर्व पार्षद समीर देसाई औ मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सेतलवाद आदि उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों में कई ऐसी घटनाओं की जानकारी, वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया में सामने आए हैं जिनमें कहीं चर्च के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने, मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक भाजपा नेत्री द्वारा एक नेत्रहीन ईसाई लड़की को धमकाने, उड़ीसा में संता कैप बेचने वालों को धमकाने, राजस्थान में एक शिक्षा अधिकारी के अभिभावकों को बच्चों को संता न बनाने की चेतावनी देने, केरल के लोकभवन में कर्मचारियों को क्रिसमस की छुट्टी न देने, छत्तीसगढ़ में एक मॉल में तोड़फोड़ करने आदि जैसी हनुमान चालीसा पढ़ने जैसी घटनाएं शामिल हैं।
(जनचौक ब्युरो की रिपोर्ट)